Concept:शोक एक स्थायी भाव है, जो करुण रस का मूल आधार है।Explanation:प्रश्न में पूछा गया है कि 'शोक' किस रस का स्थायी भाव है।हिंदी साहित्य के नवरसों में करुण रस का स्थायी भाव शोक ही होता है।जब किसी प्रियजन के वियोग, हानि या दुख से उत्पन्न पीड़ा का वर्णन किया जाता है, तब वह करुण रस कहलाता है।नीचे दी गई तालिका में सभी रसों और उनके स्थायी भाव स्पष्ट हैं:
रस - काव्य को पढ़ने, सुनने से उत्पन्न होने वाले आनंद की अनुभूति को साहित्य के अंतर्गत रस कहा जाता है। हिंदी में ‘स्थायी भाव’ के आधार पर काव्य में ‘नौ’ रस बताए गए हैं, जो निम्नलिखित हैं:-