Concept:रसराज उस रस को कहा जाता है जो सभी रसों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। आचार्य भोजराज ने श्रृंगार रस को ‘रसराज’ की उपाधि दी है।
Explanation:श्रृंगार रस का स्थायी भाव रति (प्रेम) है।
जब विभाव, अनुभाव और संचारी भावों के संयोग से रति भाव आस्वाद्य हो जाता है, तब श्रृंगार रस उत्पन्न होता है।
यह रस सुखद और दुःखद दोनों प्रकार की अनुभूतियाँ देता है।
आचार्य भोजराज ने इसे रसराज घोषित किया है।
अन्य विकल्प – वीर रस और हास्य रस – रसराज नहीं माने गए हैं।
इसलिए सही विकल्प श्रृंगार रस ही है।
अन्य रसों की संक्षिप्त परिभाषाएँ:
Answer:A. श्रृंगार रस