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Question Numbers: 121-128
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही / सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए।
जिसके पास धैर्य है, वह जो इच्छा करता है प्राप्त कर लेता है प्रकृति हमें धीरज धारण करने की सीख देती है। धैर्य जीवन में लक्ष्य प्राप्ति का द्वार खोलता है जो लोग 'जल्दी करो, जल्दी करो' की रट लगाते हैं, वे वास्तव में 'अधीर मन, गति कम की प्राचीन लोकोक्ति को चरितार्थ करते हैं। सफलता और सम्मान उन्हीं को प्राप्त होता है, जो धैर्यपूर्वक काम में लगे रहते हैं। शांत मन से किसी कार्य को करने में निश्चित रूप से कम समय लगता है। बचपन के बाद जवानी धीरे-धीरे आती है। संसार के सभी कार्य धीरे-धीरे ही संपन्न होते हैं। यदि कोई रोगी डॉक्टर से दवाई लेने के तुरंत पश्चात् पूर्णतः स्वस्थ होने की कामना करता है, तो यह उसकी नितांत मूर्खता है। वृक्ष को कितना भी पानी दो, परन्तु फल प्राप्ति तो समय पर ही होगी कहा गया है कि -
धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होत।
माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होत।
जब सब कामों का समय निश्चित है तो अधीर होने की क्या आवश्यकता है?
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही / सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए।
जिसके पास धैर्य है, वह जो इच्छा करता है प्राप्त कर लेता है प्रकृति हमें धीरज धारण करने की सीख देती है। धैर्य जीवन में लक्ष्य प्राप्ति का द्वार खोलता है जो लोग 'जल्दी करो, जल्दी करो' की रट लगाते हैं, वे वास्तव में 'अधीर मन, गति कम की प्राचीन लोकोक्ति को चरितार्थ करते हैं। सफलता और सम्मान उन्हीं को प्राप्त होता है, जो धैर्यपूर्वक काम में लगे रहते हैं। शांत मन से किसी कार्य को करने में निश्चित रूप से कम समय लगता है। बचपन के बाद जवानी धीरे-धीरे आती है। संसार के सभी कार्य धीरे-धीरे ही संपन्न होते हैं। यदि कोई रोगी डॉक्टर से दवाई लेने के तुरंत पश्चात् पूर्णतः स्वस्थ होने की कामना करता है, तो यह उसकी नितांत मूर्खता है। वृक्ष को कितना भी पानी दो, परन्तु फल प्राप्ति तो समय पर ही होगी कहा गया है कि -
धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होत।
माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होत।
जब सब कामों का समय निश्चित है तो अधीर होने की क्या आवश्यकता है?
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