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CTET Class I to V 23 Dec 2021 Paper
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Question Numbers: 121-128
निर्देशः निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर दीजिए।
वृक्षों ने मानव सभ्यता तथा मानवता को सदैव सहायता पहुँचाई है। वृक्ष एक सहायक, शिक्षक तथा मित्र रहे हैं। छायादार वृक्ष हमें छाया प्रदान करते हैं। वनों से दो प्रकार के लाभ है। प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष। वनों से हमें ईंधन, इमारती लकड़ी, गोंद, लाख, रबर, औषधियाँ, रंग, फल, फूल आदि प्राप्त होते हैं। वनों से वातावरण शुद्ध होता है। वनों से मिट्टी का कटाव रुकता है। ढलानों तथा बाँधों पर वृक्षारोपण करके वर्षा के कारण होने वाले भूमिक्षरण को रोका जा सकता है। वनों से भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाया जा सकता है क्योंकि वृक्षों की पत्तियाँ खाद बनाने के काम आती हैं। वनों से वर्षा का भी घनिष्ठ संबंध है। वर्षा का मूल कारण हरे-भरे वृक्ष ही है। वनों मे ही अनेक दुर्लभ जीव-जन्तुओं का निवास होता है। पक्षियों का कलरव प्रकृति के सुरम्य वातावरण अर्थात वनों में ही मिलता है। दियासलाई, वार्निश, रेशम, प्लाइवुड, कागज, रबर आदी उद्योगों को भी वनों पर निर्भर रहना पड़ता है।
निर्देशः निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर दीजिए।
वृक्षों ने मानव सभ्यता तथा मानवता को सदैव सहायता पहुँचाई है। वृक्ष एक सहायक, शिक्षक तथा मित्र रहे हैं। छायादार वृक्ष हमें छाया प्रदान करते हैं। वनों से दो प्रकार के लाभ है। प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष। वनों से हमें ईंधन, इमारती लकड़ी, गोंद, लाख, रबर, औषधियाँ, रंग, फल, फूल आदि प्राप्त होते हैं। वनों से वातावरण शुद्ध होता है। वनों से मिट्टी का कटाव रुकता है। ढलानों तथा बाँधों पर वृक्षारोपण करके वर्षा के कारण होने वाले भूमिक्षरण को रोका जा सकता है। वनों से भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाया जा सकता है क्योंकि वृक्षों की पत्तियाँ खाद बनाने के काम आती हैं। वनों से वर्षा का भी घनिष्ठ संबंध है। वर्षा का मूल कारण हरे-भरे वृक्ष ही है। वनों मे ही अनेक दुर्लभ जीव-जन्तुओं का निवास होता है। पक्षियों का कलरव प्रकृति के सुरम्य वातावरण अर्थात वनों में ही मिलता है। दियासलाई, वार्निश, रेशम, प्लाइवुड, कागज, रबर आदी उद्योगों को भी वनों पर निर्भर रहना पड़ता है।
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Question : 123 of 150
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