Show Para
निर्देश (प्र.सं. 136 से 144 ) : नीचे दिए गदांश को पढ़कर पूछे गए प्रशनों के सही सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनिए।
माँ: रमेश, मीना क्यों रो रही है?
रमेश : मैंने चाटा मारा था। मुझे पढ़ने नहीं दे रही थी।
माँ: लेकिन तुम इस समय क्यों पढ़ रहे हो? यह भी कोई पढ़ने का समय है? क्या आजकल पढ़ाई चौबीसों घंटे की हो गई? दिमाग है या मशीन? और क्या पढ़ने के लिए बहन को पीटना जरूरी है?
रमेश : माँ, पढ़ँगा नहीं तो कक्षा में अब्वल कैसे आऊगा? मुझे तो फर्स्ट आना है तुम भी तो यही कहती थी।
माँ: हाँ कहती थी, पर तुम? हर वक्त खेल-खेल-खेल । फर्स्ट आना था तो शुरू से पढ़ा होता । अब जब परीक्षाएँ सर पर आ गईं तो रटने बैठे हो ! तुम क्या समझते हो कि ऐसे रटने से अब्वल आ जाओगे? अरे! पढ़ना थोड़ी देर का ही काफी होता है, अगर नियम से मनलगाकर पढ़ा जाए।
रमेश : अब रहने दो माँ। मैं आज खेलने भी नहीं जाऊँगा। कोई आए तो मना कर देना। अब मुझे पढ़ने दो- "अकबर का जन्म... अकबर का जन्म... अमरकोट में हुआ था... अमरकोट में..."
माँ : अकबर का जन्म जहाँ भी हुआ हो, तुम्हारा जन्म यहीं हुआ है और में तुम्हें रट्टू तोता नहीं बनने दूँगी। पढ़ने के समय पढ़ना और खेलने के समय खेलना अच्छा होता है।
माँ: रमेश, मीना क्यों रो रही है?
रमेश : मैंने चाटा मारा था। मुझे पढ़ने नहीं दे रही थी।
माँ: लेकिन तुम इस समय क्यों पढ़ रहे हो? यह भी कोई पढ़ने का समय है? क्या आजकल पढ़ाई चौबीसों घंटे की हो गई? दिमाग है या मशीन? और क्या पढ़ने के लिए बहन को पीटना जरूरी है?
रमेश : माँ, पढ़ँगा नहीं तो कक्षा में अब्वल कैसे आऊगा? मुझे तो फर्स्ट आना है तुम भी तो यही कहती थी।
माँ: हाँ कहती थी, पर तुम? हर वक्त खेल-खेल-खेल । फर्स्ट आना था तो शुरू से पढ़ा होता । अब जब परीक्षाएँ सर पर आ गईं तो रटने बैठे हो ! तुम क्या समझते हो कि ऐसे रटने से अब्वल आ जाओगे? अरे! पढ़ना थोड़ी देर का ही काफी होता है, अगर नियम से मनलगाकर पढ़ा जाए।
रमेश : अब रहने दो माँ। मैं आज खेलने भी नहीं जाऊँगा। कोई आए तो मना कर देना। अब मुझे पढ़ने दो- "अकबर का जन्म... अकबर का जन्म... अमरकोट में हुआ था... अमरकोट में..."
माँ : अकबर का जन्म जहाँ भी हुआ हो, तुम्हारा जन्म यहीं हुआ है और में तुम्हें रट्टू तोता नहीं बनने दूँगी। पढ़ने के समय पढ़ना और खेलने के समय खेलना अच्छा होता है।
Go to Question: