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Question Numbers: 121-128
निर्देश- नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए:
मानव जीवन में श्रम का विशेष महत्त्व होता है। यही वह शक्ति है जो दुर्बल को सबल और रंक को राजा बना सकती है। परिश्रमी व्यक्ति अनवरत कर्म करते हुए बड़े-बड़े मार्ग तय कर लेता है। अपने परिश्रम के बल पर पिछड़े विद्यार्थी भी उत्तीर्ण हो सकते हैं। इस संदर्भ में वरदराज का उल्लेख करना सर्वथा उपयुक्त है। वरदराज को उनके गुरु ने बार-बार असफल होते रहने पर मंदबुद्धि समझकर अपने आश्रम से वापस भेज दिया था कि वे कुछ नहीं बन सकते, परिश्रम करना उनके वश से बाहर है। लेकिन राह में उन्हें एक कुँए के पास विश्राम के लिए रुकना पड़ा। वहाँ कुएं की मुंडेर पर ऊपर-नीचे आती जाती रस्सी से पड़े निशान को देखकर उन्हें अनवरत परिश्रम करते रहने का महत्त्व ज्ञात हुआ और वे आश्रम लौट आए। उन्होंने तत्पश्चात धैर्यपूर्वक परिश्रम किया। उसके बल पर वे ज्ञानी ऋषि वरदराज वैयाकरण के रूप में विख्यात हुए। परिश्रम व्यक्ति को उन्नति के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचा सकता है। इतिहास के अध्येता भली-भाँति समझते हैं कि कर्म और कीर्ति प्राप्त करने वाले प्रत्येक ने परिश्रम को सब से अधिक महत्त्व दिया।
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मानव जीवन में श्रम का विशेष महत्त्व होता है। यही वह शक्ति है जो दुर्बल को सबल और रंक को राजा बना सकती है। परिश्रमी व्यक्ति अनवरत कर्म करते हुए बड़े-बड़े मार्ग तय कर लेता है। अपने परिश्रम के बल पर पिछड़े विद्यार्थी भी उत्तीर्ण हो सकते हैं। इस संदर्भ में वरदराज का उल्लेख करना सर्वथा उपयुक्त है। वरदराज को उनके गुरु ने बार-बार असफल होते रहने पर मंदबुद्धि समझकर अपने आश्रम से वापस भेज दिया था कि वे कुछ नहीं बन सकते, परिश्रम करना उनके वश से बाहर है। लेकिन राह में उन्हें एक कुँए के पास विश्राम के लिए रुकना पड़ा। वहाँ कुएं की मुंडेर पर ऊपर-नीचे आती जाती रस्सी से पड़े निशान को देखकर उन्हें अनवरत परिश्रम करते रहने का महत्त्व ज्ञात हुआ और वे आश्रम लौट आए। उन्होंने तत्पश्चात धैर्यपूर्वक परिश्रम किया। उसके बल पर वे ज्ञानी ऋषि वरदराज वैयाकरण के रूप में विख्यात हुए। परिश्रम व्यक्ति को उन्नति के सर्वोच्च शिखर तक पहुंचा सकता है। इतिहास के अध्येता भली-भाँति समझते हैं कि कर्म और कीर्ति प्राप्त करने वाले प्रत्येक ने परिश्रम को सब से अधिक महत्त्व दिया।
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