Concept:बहुव्रीहि समास में कोई भी पद प्रधान नहीं होता। इसमें दोनों पद मिलकर किसी तीसरे अर्थ की ओर संकेत करते हैं।Explanation:समास में पदों की प्रधानता के आधार पर चार भेद होते हैं। अव्ययीभाव में पूर्वपद प्रधान होता है। तत्पुरुष, कर्मधारय और द्विगु में उत्तरपद प्रधान होता है। द्वन्द्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं। बहुव्रीहि समास में दोनों पद अप्रधान होते हैं, अर्थात कोई पद प्रधान नहीं होता। इस समास में तीसरा पद (अर्थ) प्रधान होता है। उदाहरण: 'महावीर' का अर्थ हनुमान और 'त्रिलोचन' का अर्थ शिव। शेष विकल्प अनुचित हैं।