Concept:शब्दों के स्रोत के आधार पर हिंदी में चार भेद हैं – तत्सम, तद्भव, देशज और आगत। शहद का मूल संस्कृत 'मधु' है, जो हिंदी में बदलकर 'शहद' हो गया, इसलिए यह तद्भव शब्द है।
Explanation:शहद शब्द संस्कृत के मधु से विकसित हुआ है।
जो शब्द संस्कृत से बिना बदले हिंदी में आए, वे तत्सम कहलाते हैं, जैसे – श्वेत, नासिका, रुक्ष।
जिनका रूप बदल जाए, वे तद्भव होते हैं, जैसे – सफेद (श्वेत), नाक (नासिका), रुख (रुक्ष)।
देशज शब्द क्षेत्रीय भाषाओं से आते हैं, जैसे – थैला, लोटा।
आगत (विदेशज) शब्द अरबी, फारसी, अंग्रेजी आदि से आए, जैसे – अदालत, ऑफिस।
चूँकि शहद संस्कृत के मधु का बदला रूप है, यह तद्भव श्रेणी में आता है।
Answer:B. तद्भव