UPSSSC PET 15 Oct 2022 Shift 2 Paper

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Question Numbers: 71-75
​निम्नलिखित अनुच्छेद को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
आज परिवारों का विघटन होता जा रहा है। परिवार सीमित और छोटे होते जा रहे हैं। पढ़े-लिखे परिवारों में एक या दो बच्चे ही होते हैं। मॉं-बाप अपने उपलब्ध संसाधनों से बड़े लाड़-प्यार से बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलवाते है और दुलार के साथ बड़ा करते हैं। पुराने समय का "लालयेत् पश्च वर्षाणि, दश वर्षांणि ताडयेत्' वाला फार्मूला अब बदल चुका है। इतना लाड मिलने के बाबजूद आज की नई पीढ़ी के बच्चे असहनशील होते जा रहे हैं। अगर शिक्षक कक्षा में उनसे कुछ भी कह दें, घर में माँ-बाप या कोई रिश्तेदार कुछ भी कह दें, तो वे तुरंत प्रतिक्रियाशील हो जाते हैं। ग्रहणशीलता समाप्त होती जा रही है और जैसा वे चाहें, वैसा करने की आज़ादी उन्हें चाहिए। अस्तु, येन-केन प्रकारेण बच्चे पढ़-लिखकर नौकरी पा जाते हैं या अपना काम संभाल लेते है। माता-पिता धीरे-धीरे बूढ़े होते जाते हैं। उनके द्वारा बचपन के प्यार से लेकर उस समय तक के त्याग और बलिदान उन्ही के अपने बच्चों द्वारा भुला दिए जाते है। अब माँ-बाप बूढ़े और शक्तिहीन है और बच्चों पर बोझ़। आज के बूढ़े माँ - बाप पिछली पीढ़ी के बूढ़े माँ-बाप की तुलना में अधिक दयनीय से होते जा रहे हैं। उन्हीं के द्वारा पालित-पोषित बच्चे उन्हें अपने परिवार का सदस्य मन से स्वीकार नहीं कर रहे हैं। यही कारण है कि बुढ़ापे में या तो माँ-बाप अकेले रहते है और या अपने ही घर में दीन-हीन से होकर बच्चों का मुँह ताकते हैं। पीढ़ियों के अंतराल से जीवन मूल्यों में तेजी से बदलाव हो रहा है। अच्छी भावना से भी यदि बूढ़े माँ-बाप वयस्क बच्चों या उनके परिवार के विषय में कुछ सलाह देते हैं, तो उनकी सलाह का सम्मान नही होता। यह संभवतः पीढ़ियों के अंतराल का परिणाम है। अब समय बदल गया है और अनुभवपूर्ण सलाह की इस नई पीढ़ी को आवश्यकता नहीं है। अपेक्षा की जाती है कि यदि उन्हें साथ रहना है तो एडजस्ट करके चलें, अन्यथा वृद्धाश्रम में हम-उम्र लोगों के बीच समय बिताएँ। खुद भी चैन से रहें और उन्हें भी अपनी तरह से चैन से रहने दें। क्या वास्तव में इस सबके लिए युवा पीढ़ी ही दोषी है या कुछ दोष वृद्धों का भी है?
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Question : 72
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