Concept:यदि
AB∥DC,
AD=BC तथा
AD∦BC हो, तो ABCD एक समद्विबाहु समलंब बनता है, जिसमें
∠ABC+∠ADC=180∘ होता है।
Explanation:कथन I अकेले पर्याप्त नहीं है, क्योंकि
AB∥DC और
AD=BC के साथ
AD∥BC होना भी संभव है।
ऐसी स्थिति में ABCD एक समांतर चतुर्भुज होगा, जिसमें
∠ABC+∠ADC का कोई निश्चित मान नहीं होता।
उदाहरण के लिए, आयत में यह योग
180∘ है, जबकि एक झुके हुए समांतर चतुर्भुज में यह
270∘ जैसा मान भी हो सकता है।
अतः केवल कथन I से उत्तर निर्धारित नहीं होता।
कथन II अकेले पर्याप्त नहीं है, क्योंकि केवल
AD∦BC दिए रहने पर चतुर्भुज का कोई विशेष रूप सुनिश्चित नहीं होता।
AD = BC होने पर भी
∠ABC+∠ADC भिन्न-भिन्न मान ले सकता है।
इसलिए केवल कथन II से भी उत्तर नहीं दिया जा सकता।
दोनों कथनों को एक साथ लेने पर
AB∥DC,
AD=BC तथा
AD∦BC प्राप्त होता है, अतः ABCD एक समद्विबाहु समलंब है।
समद्विबाहु समलंब में एक ही आधार पर बने कोण बराबर होते हैं, इसलिए
∠ABC=∠DAB।
चूँकि
AB∥DC है, समांतर रेखाओं पर तिर्यक AD द्वारा बने अंतः कोण संपूरक होते हैं, अतः
∠DAB+∠ADC=180∘।
इससे
∠ABC+∠ADC=180∘ प्राप्त होता है।
अतः इस प्रश्न का उत्तर दोनों कथनों को एक साथ उपयोग करके दिया जा सकता है, परंतु अकेले किसी एक कथन से नहीं।
Answer:विकल्प A