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CTET Paper I (Classes I to V) Sep 2016 Solved Paper

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Question Numbers: 144-150
निर्देश: बारिश के लिहाज से वह साल ठन-ठन गोपाल था। खेतों में जैसे-तैसे धान रोप दिया गया था लेकिन तेज धूप ने उसे झुलसा डाला था। सावन सिर पर था ओर बादल लापता। कि तभी एक उमसती हुई रात में बिजली कड़कने से नींद खुली। थोड़ी देर में झिस्सियाँ पड़ने लगीं। चारपाइयाँ आँगन से उठाकर भीतर कर ली गई। लेकिन हवा गुम थी और गर्मी ज्यों-की-त्यों, लिहाजा वह रात रतजगे में ही गई। सुबह हुई तो लोग धन बच जाने को लेकर ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करते दिखे। बरसात रात वाली रफ्तार से ही जारी थी। न उससे धीमी, न तेज। आसमान समतल और तकरीबन सफेद था। बादल बीच-बीच में जरा-सा गुर्राकर खामोश हो जा रहे थे। स्कूल का टाइम हुआ तो हम जैसे ढीलों ने इकतरफा तौर पर ‘रेनी डे’ मनाने का फैसला किया,जबकि पढ़ाकुओं ने बस्ता लादा और सुपरिचित रास्ते पर बढ़ चले। थके-हारे पढ़वैये शाम को लौटे तो उनकी हालत कटे खेत में पानी भरने पर भागे चूहों जैसी थी। बारिश से बुरी तरह ऊबकर हम सोए, इस उम्मीद में कि कल नीला आकाश देखने को मिलेगा।
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Question : 145 of 150
Marks: +1, -0
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