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CTET Paper I (Classes I to V) Sep 2016 Solved Paper
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Question Numbers: 136-143निर्देश: हमें स्वतंत्र हुए 15 वर्ष ही हुए थे कि पड़ोसी चीन ने हमारी पीठ में छुरा भोंक दिया। उत्तरी सीमा सफेद बर्फीली चोटियाँ शहीदों के खून से सनकर लाल हो गईं। हजारों माँओं की गोदें सूनी हुईं, हजारों की माँग का सिंदूर पुँछ गया और लाखों अभागे बच्चे पिता के प्यार से वंचित हो गए।गणतंत्र दिवस निकट आ रहा था। देश का हौसला पस्त था। कोई उमंग नहीं रह गई थी पर्व मनाने की। तब यह सोचा गया कि जानी-मानी फिल्मी हस्तियॉं आयोजन में शमिल हों तो भीड़ उमड़ेगी। वहाँ कोई ऐसा गीत प्रस्तुत हो जो लोगो के दिलों को छूकर उन्हें झकझोर सके। चुनौती फिल्म जगत तक पहुँची। एक नौजवान गीतकार प्रदीप ने चुनौती स्वीकारने का मन बनाया और गीत लिखना शुरू किया। लेकिन सुर और स्वर के बिना गीत का क्या! प्रदीप संगीत निर्देशक सी रामचंद्र के पास पहुँचे। उन्हें गीत पसंद आया और रक्षा मंत्रालय को सूचना दे दी गई।26 जनवरी का शुभ दिन आया। लाखों की भीड़ बड़ी उत्सुकता से प्रतीक्षा कर रही थी। तब तक जो धुन बज रही थी वह हटी और थोड़ी देर शांति रही। तभी उस शांति को चीरता हुआ लता मंगेशकर का वेदना और चुनौती भरा स्वर सुनाई पड़ा- “ऐ मेरे वतन के लोगो जरा आँख में भर लो पानी।” समय जैसे थम गया। सभी के मन एक ही भाव, एक ही रस में डूब गए। गीत समाप्त हुआ तो लगभग दो लाख लोग सिसक रहे थे। आूंसू थे कि थमते ही न थे।
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