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CTET Paper I (Classes I to V) Feb 2016 Solved Paper

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Question Numbers: 144-150
निर्देश : नीचे दिए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही/सबसे उपयुत्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। रिक्शे पर मीरा के साथ हॅंसती-बोलती नव घर पहुँची। सीढ़ियाँ चढ़ने लगी तो कुछ झगड़ने की आवाजें सुनाई दी। ऊपर पहुँची तो देखा, दोनों आजू-बाजू वाली पड़ोसनें झगड़ रही थीं। अपने दरवाज़े के पास खड़ी होकर उसने कुछ देर उनकी बातें सुनीं तो झगड़े का कारण समझ में आया। एक की महरी ने घर साफ़ करके कचरा दूसरी के दरवाज़े की ओर फेंक दिया था, इसी बात का झगड़ा था। ऋतु ने दोनों को समझाया-बुझाया। आखिरकार कचरा फेंकने वाली महरी को बुलाया गया। उसने झाड़ू थामी और कचरा सीढ़ी की ओर धकेल दिया। फिर वह महरी अंदर चली गई। दोनों पड़ोसनों ने भी अंदर जाकर अपने-अपने द्वार बंद कर लिए।
ऋतु खड़ी-खड़ी देखती रही। जो सीढ़ी पहले से ही गंदी थी वह और भी गंदी हो गई। रेत का तो साम्राज्य ही था। कहीं बादाम के छिलके पड़े थे तो कहीं चूसी हुई ईख के लच्छे; कहीं बालों का गुच्छा उड़ रहा था तो कहीं कुछ और। मन वितृष्णा से भर उठा। सोचा, इस सीढ़ी से चढ़कर सब अपने घर तक आते हैं, इससे उतरकर दफ़्तर, बाज़ार आदि अपनी इच्छित जगहों पर जाते हैं, पर इसे कोई साफ़ नहीं करता। उलटे सब इस पर कचरा फेंक देते हैं। साझे की सीढ़ी है न! गंदगी बिखेरने का हक सबको मिला है और साफ़ करने का कर्तव्य किसी का नहीं है। स्वच्छता तो जैसे अनबुझी तृष्णा हो गई।
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Question : 150 of 150
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