Test Index

CTET Paper I (Classes I to V) Feb 2016 Solved Paper

Show Para  Hide Para 
Question Numbers: 136-143
निर्देश : नीचे दिए गध्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही /सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए। मेरे बड़े भाई साहब मुझसे पाँच साल बड़े थे, लेकिन केवल तीन दरजे आगे। उन्होंने भी उसी उम्र में पढ़ना शुरू किया था जब मैंने शुरू किया, लेकिन तालीम जैसे महत्त्व के मामले में वह जल्दबाजी से काम लेना पसंद न करते थे; इस भवन की बुनियाद खूब मज़बूत डालना चाहते थे, जिस पर आलीशान महल बन सके। एक साल का काम दो साल में करते थे। कभी-कभी तीन साल भी लग जाते थे। बुनियाद ही पुख्ता न हो तो मकान कैसे पायदार बने।
मैं छोटा था, वे बड़े थे। मेरी उम्र नौ साल की थी, वे चौदह साल के थे। उन्हें मेरी निगरानी का पूरा और जन्मसिद्ध अधिकार था और मेरी शालीनता इसी बात में थी कि उनके हुक्म को कानून समझूँ। वह स्वभाव के बड़े अध्ययनशील थे। हरदम किताब खोले बैठे रहते और शायद दिमाग को आराम देने के लिए कभी कॉपी पर, कभी किताब के हाशियों पर, चिड़ियों, कुत्तों, बिल्लियों की तस्वीरें बनाया करते थे। कभी-कभी एक ही नाम या शब्द या वाक्य दस-बीस बार लिख डालते। कभी एक शेर को बार-बार सुंदर अक्षरों में नकल करते। कभी ऐसी शब्द-रचना करते जिसमें न कोई अर्थ होता, न कोई सामंजस्य। जैसे एक बार उनकी कॉपी पर मैंने इबारत देखी--स्पेशल, अमीना, भाइयो-भाइयो, भाई-भाई, श्रीयुत्‌ राधेश्याम--इनके बाद आदमी का चेहरा बना हुआ था। मैंने बहत चेष्ठा की कि इस पहेली का कोई हल निकालूँ, लेकिन असफल रहा और उनसे पूछने का साहस न हुआ। वे नवीं कक्षा में थे, मैं पाँचवीं में। उनकी रचनाओं को समझना मेरे लिए छोटा मुँह और बड़ी बात थी।
--मुंशी प्रेमचंद
© examsnet.com
Question : 136 of 150
Marks: +1, -0
Go to Question: