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Question Numbers: 129-135
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही । सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए।
एक समय था जब प्रकृति ने मनुष्य को अपनी मुट्ठी में बंद कर रखा था। सभ्यता के विकास के साथ ही प्रकृति मनुष्य की दासी बन गई। अब ऊँचे-ऊँचे भवनों में रहने वाले मानव ने अपने ऐशो आराम के लिए अनगिनत साधन जुटा लिए हैं। क्या जल, क्या थल, क्या अंबर ! - सभी मनुष्य के अधीन हैं। अब कोई 'ऐसा रहस्य नहीं जिसका व्यापक ज्ञान मानव को न हो । एवरेस्ट के सर्वोच्च शिखर को भी मनुष्य के समक्ष नतमस्तक होना पड़ा है। इसका कारण है मानव का अदम्य साहस, कभी न हार मानने वाली प्रवृत्ति। यह ज़रूरी है कि सफलता पाने के लिए ध्येय तक पहुँचने की तीव्र उत्कंठा, लगन और आत्मविश्वास होना ही चाहिए पर परमावश्यक है साहस, हिम्मत। जहाँ साहस है, विवेक है, सामर्थ्य है, शक्ति है, बुद्धि है वहाँ सफलता भी बाँहें पसारे खड़ी रहती है। संसार में ऐसा कौन-सा कार्य है, जिसे साहसी पुरुष सफलतापूर्वक नहीं कर सकता है।
निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सही । सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए।
एक समय था जब प्रकृति ने मनुष्य को अपनी मुट्ठी में बंद कर रखा था। सभ्यता के विकास के साथ ही प्रकृति मनुष्य की दासी बन गई। अब ऊँचे-ऊँचे भवनों में रहने वाले मानव ने अपने ऐशो आराम के लिए अनगिनत साधन जुटा लिए हैं। क्या जल, क्या थल, क्या अंबर ! - सभी मनुष्य के अधीन हैं। अब कोई 'ऐसा रहस्य नहीं जिसका व्यापक ज्ञान मानव को न हो । एवरेस्ट के सर्वोच्च शिखर को भी मनुष्य के समक्ष नतमस्तक होना पड़ा है। इसका कारण है मानव का अदम्य साहस, कभी न हार मानने वाली प्रवृत्ति। यह ज़रूरी है कि सफलता पाने के लिए ध्येय तक पहुँचने की तीव्र उत्कंठा, लगन और आत्मविश्वास होना ही चाहिए पर परमावश्यक है साहस, हिम्मत। जहाँ साहस है, विवेक है, सामर्थ्य है, शक्ति है, बुद्धि है वहाँ सफलता भी बाँहें पसारे खड़ी रहती है। संसार में ऐसा कौन-सा कार्य है, जिसे साहसी पुरुष सफलतापूर्वक नहीं कर सकता है।
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Question : 129
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